
बॉलीवुड और हॉलीवुड समेत तमाम फिल्म इंडस्ट्रीज में आज जहां एक-एक फिल्म को बनाने में करोड़ों रुपये खर्च कर दिए जा रहे हैं, वहीं भारतीय सिनेमा ने दर्शकों को कई ऐसी आइकॉनिक फिल्में दी हैं, जिन्हें बहुत कम बजट में बनाया गया था। बावजूद इसके ये फिल्में आइकॉनिक हिट रहीं, इन फिल्मों को इतना पसंद किया गया कि आज भी अगर इन्हें चला दिया जाए तो दर्शकों के लिए टीवी के सामने से हटना मुश्किल हो जाता है।

2/8नसीरुद्दीन शाह और अनुपम खेर स्टारर यह फिल्म बिना किसी आइटम नंबर या मसाला स्टोरी के सुपरहिट रही थी। महज ₹5 करोड़ के बजट में बनी इस थ्रिलर ने बेस्ट डेब्यू फिल्म के लिए नेशनल अवॉर्ड जीता। फिल्म को इतना पसंद किया गया कि इसे हॉलीवुड में रीमेक भी किया गया था।

3/8दिवगंत एक्टर इरफान खान की बेमिसाल एक्टिंग वाली इस फिल्म ने 'बेस्ट फीचर फिल्म' का नेशनल अवॉर्ड जीता। महज 8 करोड़ रुपये के बजट में बनी यह फिल्म रिकॉर्ड हिट रही थी। एक नेशनल एथलीट के 'बागी' बनने की यह सच्ची कहानी रोंगटे खड़े कर देती है।

4/8महज 10 करोड़ रुपये की लागत में बनी यह बहुत यूनिक फिल्म है। ऑफिस में एक टिफिन का गलत पते पर डिलीवर हो जाना एक अनूठी प्रेम कहानी को शुरू करता है। इरफान खान और निम्रत कौर की सादगी भरी इस फिल्म की IMDb रेटिंग 7.8 है।

5/8एक मिडिल क्लास परिवार के लिए उसका घर उसके सपनों का आशियाना होने के साथ-साथ उसकी जिंदगी भर की कमाई भी होता है। लेकिन जब कोई भू-माफिया उस जमीन पर कब्जा कर ले, जिस पर आप घर बनाने का सपना देख रहे थे तो? महज 3.5 करोड़ रुपये की लागत में बनी अनुपम खेर और बोमन ईरानी की यह क्लासिक कॉमेडी फिल्म हंसाती भी है और सोचने को मजबूर भी करती है।

6/8अनुराग कश्यप कम बजट में कल्ट फिल्में बनाने के लिए जाने जाते हैं। ब्लैक फ्राइडे उनकी ऐसी ही कुछ फिल्मों में से एक है। अनुराग कश्यप की इस फिल्म ने मुंबई धमाकों की कड़वी हकीकत को पर्दे पर उतारा, जिसे रिलीज होने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। इसे बनाने में महज 4 करोड़ रुपये खर्च हुए थे।

7/8राजकुमार राव की कुछ सबसे शानदार फिल्मों में से एक 'शाहिद' महज 1 करोड़ रुपये में बन गई थी। इस फिल्म ने राजकुमार राव को उनका पहला 'बेस्ट एक्टर' नेशनल अवॉर्ड दिलाया।

8/8यह एक फिल्म कम और डॉक्यूमेंट्री ज्यादा कही जा सकती है। सच्ची घटना पर आधारित यह फिल्म लोगों के दिलों को छू गई थी। कहानी एक ऐसे छोटे से गांव की है, जहां फिल्में सिर्फ मनोरंजन का जरिया नहीं, उससे बहुत बढ़कर हो जाती हैं।
