अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में अक्सर दावा करते हैं कि उन्होंने आठ युद्धों को समाप्त करवाया, जिसमें थाईलैंड-कंबोडिया सीमा विवाद भी शामिल है। लेकिन अब उनकी ये शांति कोशिशें एक बार फिर विवादों में घिर गई है। दरअसल, थाईलैंड की सेना ने कंबोडिया पर विवादित सीमा क्षेत्र में नई बारूदी सुरंगें लगाने का आरोप लगाया है। थाई पक्ष का कहना है कि इन सुरंगों के फटने से उसके सैनिकों को गंभीर चोटें आई हैं, और यह हाल ही में ट्रंप की निगरानी में दोनों देशों के बीच हुए शांति समझौते का स्पष्ट उल्लंघन है।
बैंकॉक पोस्ट के अनुसार, थाई सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल विन्थाई सुवारी ने बताया कि फोरेंसिक टीम ने सोमवार दोपहर कंथारालक जिले के सी सा केट इलाके में विस्फोट स्थल का जायजा लिया। वहां एक गड्ढा और तीन अतिरिक्त एंटी-पर्सनल माइंस मिलीं। थाई सेना ने कहा कि उसी दिन सीमा पर गश्त के दौरान एक सैनिक के पैर बारूदी सुरंग पर पड़ने से चार थाई जवान घायल हो गए, जिनमें एक को पैर कटवाना पड़ा। इस घटना के बाद थाई प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल ने थाई-कंबोडिया शांति समझौते को अमल में लाने और 18 पकड़े गए कंबोडियाई सैनिकों की रिहाई को रोक दिया है।
मेजर जनरल विन्थाई के हवाले से बैंकॉक पोस्ट ने लिखा कि यह कदम कंबोडिया की बेईमानी को उजागर करता है, जो संघर्ष कम करने के वादों के खिलाफ है और संयुक्त घोषणा का खुला उल्लंघन है। वहीं, रक्षा मंत्री नट्टापोन नरकफनित ने कहा कि ये माइंस ताजा लगाई गई लगती हैं, क्योंकि विस्फोट उस रूट पर हुआ जहां थाई सैनिक रोज गश्त करते हैं। थाईलैंड ने कंबोडियाई सरकार से भी कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
दूसरी ओर, सोमवार रात को जारी बयान में कंबोडिया के रक्षा मंत्रालय ने थाई आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। मंत्रालय का दावा है कि विस्फोट जिस पुरानी सुरंग से हुआ, वह कंबोडिया के गृहयुद्ध के जमाने की है। बयान में जोर दिया गया कि कंबोडिया ने नागरिकों या सैनिकों को खतरा पहुंचाने वाली कोई नई माइंस नहीं लगाई।
मंत्रालय ने जिनेवा कन्वेंशन का पालन करने और समझौते की शर्तों का सम्मान करने की प्रतिबद्धता दोहराई, जिसमें एंटी-पर्सनल माइंस पर सख्त पाबंदी है। साथ ही, थाईलैंड के समझौते की सभी गतिविधियां रोकने के फैसले पर चिंता जताई गई। संयुक्त घोषणा में भारी हथियारों को सीमा से हटाने और कंबोडियाई कैदियों की रिहाई जैसे वादे शामिल थे।

